Saturday, 1 August 2015

शुभ मित्रता दिवस !




डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

जीवन में चाहा है बनाना जो किसी को मीत ,

कहती हूँ दिल से कि दिल से बनाइये ।

ज़रा सी न ठेस लगे टूटने न पाए कभी ,

रूठ जाए आपसे तो झट से मनाइए ।

कंटकों को राह के समेटने की चाह रख ,

खुशियों के फूल सदा पथ में बिछाइए ।

द्वापर में कान्हा ने सुदामा से निभाई जैसे ,

कलियुग में वैसे मीत ...आप निभाइए ........


हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ..


                      ज्योत्स्ना शर्मा 


( chitr googal se saabhaar )

7 comments:


  1. जीवन में चाहा है बनाना जो किसी को मीत ,

    कहती हूँ दिल से कि दिल से बनाइये ।

    ज़रा सी न ठेस लगे टूटने न पाए कभी ,

    रूठ जाए आपसे तो झट से मनाइए ।

    कंटकों को राह के समेटने की चाह रख ,

    खुशियों के फूल सदा पथ में बिछाइए ।

    द्वापर में कान्हा ने सुदामा से निभाई जैसे ,

    कलियुग में वैसे मीत ...आप निभाइए ........

    हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ..

    ज्योत्स्ना शर्मा

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  2. सभी रचनाएँ बहुत प्रभावशाली हैं।

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  3. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

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