Thursday, 7 October 2021

166-सदा सदय हो



मन सबका सम्मान भी रखना ,
लेकिन स्वाभिमान भी रखना ।

करो अनुसरण गुणीजनों का ,
पर खुद की पहचान भी रखना ।

आगे बढ़ना पथ में , साथी ,
दीन-दुखी पर सदा सदय हो ;

प्रेम , अहिंसा , स्नेह , समर्पण ,
थोड़ा सा तूफान भी रखना ।।1

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होने को साकार ,सलोना-
स्वप्न कोई तो पलना होगा

मंज़िल पा लेने को ज़िद का
एक तूफान मचलना होगा

इसके साथ-साथ ही साथी
यही सत्य है इस जीवन में

नींद और आराम त्यागकर
खुद ही उठकर चलना होगा ।।2

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नदिया का मन सरसाने को
पर्वत को गलना होता है !

अम्बर छूने की चाहत में
सागर को जलना होता है  !

पाने और खोने की लय में
बँधा हुआ चलता है जीवन

एक सुनहरी साँझ की खातिर
सूरज को ढलना होता है ।।3

*********************

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


(चित्र गूगल से साभार)




11 comments:

  1. 🌷🙏🌷दीन-दुखी पर सदा सदय हो 🌷🙏🌷

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  2. Replies
    1. हृदय से आभार मीना शर्मा जी, वन्दन- अभिनंदन 🙏💐

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  3. कितनी सरल! तिस पर भी कितनी प्रभावी और कितनी सच्ची! ऐसी विलक्षण कविता की रचना तो आप जैसी विदुषी ही कर सकती है ज्योत्स्ना जी। मैं इस कविता को (आपकी पूर्वानुमति से) किसी समारोह में सुनाना चाहूंगा। इस सृजन के निमित्त असीमित अभिनंदन आपका।

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  4. वन्दन-अभिनंदन जितेन्द्र माथुर जी 🙏💐
    मेरे लिए लेखन माँ सरस्वती की आराधना है । मुझे लगता है उन्होने ही आपको भेजा है यहाँ , मेरी सूनी पड़ी पोस्ट पर ...इस तरह मेरा उत्साह बढ़ाने ...अब किसे आभार कहूँ , बस जय माँ शारदे 🙏

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  5. जितेन्द्र जी आपके द्वारा मेरी कविता का पाठ उसकौ गौरव प्रदान करेगा 🙏

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  6. जीवन जीने का असली पाठ पढ़ाती हुई बहुत ही प्रेरक वा प्रभावी रचना एक एक पंक्ति बहुत ही उम्दा व सराहनीय है!

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  7. सुन्दर, प्रेरक प्रतिक्रिया सहित उपस्थिति के लिए हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ मनीषा जी 🙏💐

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  8. वाह!!
    कितने निश्छल कितने पवित्र सुंदर कोमल भाव।
    आपकी रचना मन मोह गई ।
    बधाई।

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  9. सुन्दर, प्रेरक प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार आपका!
    आपके कमेंट्स नव लेखन की ऊर्जा हैं 🙏

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  10. आशा की किरण जैसी सुंदर सुहानी कृतियाँ,बहुत बधाई आपको।

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