डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
(बस चित्र के भाव पर .....एक प्रस्तुति ......)
कजरारी अँखियाँ करें ,आज
वार पर वार।
हमसे जीतोगे पिया ,पाओगे
तुम हार।।
चमकी चित में चाँदनी ,दम-दम
दमके रूप ,
पाई जब से देह ने ,तेरे
नेह की धूप।
यूँ तो तुमसे मिल हुईं ,सब
आशा साकार ;
हमसे जीतोगे पिया ,पाओगे
तुम हार।।
दुनिया ने सपने बुने ,हमने
बुन ली प्रीत ,
ड्योढ़ी लँघी न लाज की , छोड़ न पाई रीत।
दुख देकर चाहा नहीं ,सुखों
भरा संसार ;
हमसे जीतोगे पिया ,पाओगे
तुम हार।।
अब किससे शिकवा करें ,कहाँ
करें फरियाद ,
कौन पहर आई नहीं ,हमें
तुम्हारी याद।
पलक मूँद,मन , कैद कर! हुकुम करे सरकार ;
हमसे जीतोगे पिया ,पाओगे
तुम हार।।
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