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Wednesday, 10 March 2021

156- दमके निरंजना माँ बिंदिया ये माथ की !

  जय भोले नाथ !!!


                  मधुर मिलन घड़ी भोले जी के साथ आज ,
                  दमके निरंजना माँ बिंदिया ये माथ की ।
                  घोट-घोट भाँग यहाँ भूत-प्रेत छान रहे ,
                  पिस रही मेंहंदी भी हरी हरी हाथ की ।
                   कलियों के गजरों से गौरा मात सज गईं ,
                   सोम,सर्प पाए हैं विशेष द्युति साथ की ।
                   बाजते मृदंग संग डमरू भरें उमंग ,
                    चल दी है देखिए बारात भोले नाथ की ।।

                                                   डॉ.  ज्योत्स्ना शर्मा 

Friday, 31 July 2015

नमन गुरुवर !




सृजन की चाह लिए ,संचित उड़ेलकर ,
जगती का जैसे कि पर्जन्य ताप धोता है |
स्नेह से दुलारे कभी ,दण्ड का विधान कर ,
कुम्भकार सम नव रूप में संजोता है |
नन्हीं-नन्हीं कलियों में सुविचार सींच कर ,
राष्ट्र के निर्माण हेतु प्राण बीज बोता है ,
कृष्ण ,रामकृष्ण ,सार्थ ,दे विवेक और पार्थ ,
विज्ञ ,वन्दनीय वह गुरु धन्य होता है ||

ऐसे सद्गुरु की कृपा सबको सदा प्राप्त हो ..बारम्बार नमन और हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ...
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

(चित्र गूगल से साभार )

Sunday, 25 January 2015

शुभ गणतंत्र दिवस !



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


पवन भी गाये आज वन्दना तुम्हारी झूम ,

सरस दिशा-दिशा सनेह से दुलारती |

हरा-भरा लंहगा सुनहरी लाई ओढ़नी ,

कलियों को गूँथ-गूँथ अलकें संवारती |

मन में भरी उमंग साजते हैं सप्तरंग ,

रुचिर घटा भी देख सुरधनु वारती |

केसरिया ,सित ,हरा ,भोग,योग ,त्याग भरा ,
मन में बसे हैं मेरे तीन रंग भारती ||




नमन है बार-बार शारदे माँ देना तार ,

सुन लेना इतनी सी विनय हमारी है |

भरके उमंग कहे कलम हमारी आज ,

कसम निभाने की हमारी भी तो बारी है |

भारत से ,भारती माँ ! जाने की ज़रा न चाह ,

जब तक मुदित न , जननी निहारी है |

आज बंधनों से आप ,खोल दीजिए न हाथ  ,

एक-एक वीर मेरा सैकड़ों पे भारी है ||

हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ 
ज्योत्स्ना शर्मा 
चित्र गूगल से साभार

 




Saturday, 2 November 2013

*****शुभ दीपावली *****

                                  चित्र गूगल से साभार 
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

तिमिर घना हो भले,तारों की ज़रा न चले ,
सूझे नहीं पथ तो......दिए सा जल जाएँगें  |
भाव कटु दूर करें.........जीवन में रस भरें ,
बोंएँ बीज प्रीत के..........मधुर फल पाएँगें |
लालसा है लेने की जो,देना भी तो सीख लेना ,
ध्यान धरें चरण...........विघन टल जाएँगें |
हृदय की है चाह यही......अब उत्साह यही ,
ज्योति कब प्रेम की.......जगत में जलाएँगें ||

देखिए तो हर ओर........बहुत हुआ है शोर ,
कारा भला तम की.....ये कैसे कट पाएगी |
शुचिता होवे मन की.....पावनता लगन की ,
स्नेह से भरो न दीप........पीर घट जाएगी |
खिली खिली फुलझड़ी.....लेकर जादुई छड़ी,
ये न सोच कोई परी..........तेरे घर आएगी |
खीलों व खिलौनों की मिठास आसपास बाँट,
सदय हो समृद्धि.........सब संग मुस्काएगी ||

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