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Wednesday, 24 October 2018

138-हे कविवर ,आभार !



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

कथा सुनाई राम की , किया बड़ा उपकार |
सदा करेंगे आपका , हे कविवर आभार ||
हे कविवर आभार , दी ऐसी अमृत-धारा ,
करके जिसका पान , मिटे दुख जग का सारा |
नष्ट करे नित पाप , नाम की महिमा गाई ;
धन्य-धन्य हैं आप , राम की कथा सुनाई ||



                       (चित्र गूगल से साभार )

                                   -०-०-०-०-०-०-

Monday, 22 January 2018

124-ज्यों आए हों कन्त !


    
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 



चन्दन वन सा मन हुआ ,महके है दिन रैन,
तृष्णा की विष वल्लरी कब लेने दें चैन |
कब लेने दें चैन लगे फल आह व्यथा के ,
शेष नहीं हैं  बैन  ,सुवासित सरस कथा के |
मातु करो उपकार प्रभासित कर कंचन सा ,
हो अति मधुर उदार ,चारु चित चन्दन वन सा ||1

कलियाँ ख़ुशियों की खिलीं ,ज्यों आए हों कन्त,
धरा मगन,द्वारे खड़े ,हैं ऋतुराज वसन्त |
हैं ऋतुराज वसन्त ,पीत परिधान सुहावन,
सुरभित मंद झकोर  ,मधुर गुंजन मनभावन |
बौराई रुत ,आम्रझूम उठते घर-गलियाँ ,
मिटे सकल संतापन कैसे खिलतीं कलियाँ ||2

        ***********0**************


Wednesday, 3 June 2015

जीवन खेला राम का !



डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
जीवन खेला राम का ,रंगमंच संसार
और निभाने हैं हमें , अलग-अलग किरदार
अलग-अलग किरदार ,खेल है मन से खेलो 
पल-पल बदलो रूप , मिले जो सुख-दुख झेलो
मृग-मरीचिका हन्त ! रहेगा प्यासा ही मन 
कर अभिनय जीवन्त ,मात्र खेला है जीवन ।।
~~~~~~~~****~~~~~~~~


चित्र गूगल से साभार

Monday, 1 June 2015

गर्मी के तेवर !!!!


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
1
दिन  ने खोले नयन जब ,बड़ा विकट था हाल ,
पवन,पुष्प ,तरु ,ताल ,भू ,सबके सब बेहाल।

सबके सब बेहाल ,कुपित कुछ लगते ज़्यादा  ,
ले आँखों अंगार , खड़े थे सूरज दादा।

घोल रहा विष कौन .गरज कर तब वह बोले ,
लज्जित मन हैं मौन , नयन जब दिन  ने खोले।।१  
2
गर्मी के तेवर बढ़े ,और बिजुरिया  गोल , 
शरबत , लस्सी  ,छाछ पर , चल अब हल्ला  बोल।

चल अब हल्ला बोल , आम सा फल नहीं दूजा  ,
भाया है तरबूज , और मीठा खरबूजा।

नींबू , पना , सलाद , भरे तबियत में नर्मी  ,
वश में हों हालात  , शांत हो थोड़ी गर्मी ।।२ 
 -0-
(चित्र गूगल से साभार )

~~~~~~******~~~~~~



Wednesday, 27 May 2015

जय माँ गंगे !


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा


गौमुख से गंगा चली , बह सागर की ओर ,

देख रही माँ भारती ,होकर भाव –विभोर |

होकर भाव- विभोर  , हुई हर्षित  भू पावन , 

नित-नित संध्या भोर , सुहावन तट मन-भावन |

जिसका केवल ध्यान  ,भरे जीवन को सुख से ,

कर तन-मन अम्लान , चली गंगा गौमुख से ||
~~~~~~~~@@@@@~~~~~~~~~
चित्र गूगल से साभार


Wednesday, 5 November 2014

भरे उजास !


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

तेरे प्यार ने
नहीं बुझने दिया
जीवन दिया |

~~~~*****~~~~*****~~~~~

भीगी बाती स्नेह से , जलकर भरे उजास ,
महका सा जीवन हुआ , बिखरे प्रेम-सुवास |
बिखरे प्रेम सुवास ,खिले मन-आँगन कलियाँ ,
मधुर बजे संगीत ,बोल मिसरी की डलियाँ |
सुख बरसे चहुँओर ,मुदित-मन मंगल गाती ,
काटे कलुष कठोर , स्नेह से भीगी बाती ||


स्नेह से भरे ,आशा के दीप सदा झिलमिलाएं ...देव दिवाली की हार्दिक शुभ कामनाएँ !

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चित्र गूगल से साभार 



Friday, 3 October 2014

रामा दल में धूम है !


डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 

बनवासी श्री राम ने ,किया दुष्ट संहार |
सब साधन संपन्न हम ,मिटे न भ्रष्टाचार |
मिटे न भ्रष्टाचार , भूल हम जान न पाए ,
पाया तो जनतंत्र , मंत्र सम्मान न पाए |
जले हृदय का दीप , अमावसपूरनमासी ,
कुत्सित कर्म ,कुरीत, करें सबको बनवासी ||

रामा दल में धूम है ,प्रमुदित सकल समाज ,
प्रभु कारज जीवन-मरण ,यही याचना आज |
यही याचना आज , भाव शुभ मन में जागें ,
लोभ ,कुटिलता, काम ,निशाचर सारे भागें |
राम नाम के कँवल,खिलें मन-निर्मल जल में ,
कभी न व्यापे मोह ,रहूँ बस रामा दल में ||

शक्ति और शान्ति के शाश्वत स्वर को मुखर करता विजया दशमी पर्व सब ओर सत्य और धर्म की स्थापना करे ...बहुत शुभ कामनाएँ !!

              ~~~~~~~~*****~~~~~~~~

(चित्र गूगल से साभार )


Thursday, 17 October 2013

सुधा बरसती शारदी !!

                                                                चित्र :गूगल से साभार
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 

सुधा बरसती शारदी , शीतल ,सुन्दर रात ,
अद्भुत ,वाणी से परे , पावनता की बात |
पावनता की बात  , साँवरा रास रचाए ,
दर्प भरे कन्दर्प  , मात कान्हा से खाए |
संग राधिका श्याम,निरख मन कली सरसती ,
सुन वंशी की तान  , लगे ज्यूँ सुधा बरसती ||

शरत् पूर्णिमा की रात काम को भी जीत लेने वाले मेरे कान्हा सभी के मन को मधुरता और पवित्रता से परिपूर्ण करें .....जय श्री कृष्णा !!

................ज्योत्स्ना शर्मा 

Monday, 7 October 2013

माँ धरणी सम धारिणी !!




                               चित्र गूगल से साभार 
डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 


मैया जीवन दायिनी ,सब सुख का आधार ,
माँ धरणी सम धारिणी ,माँ नभ सा विस्तार |
माँ नभ सा विस्तार ,स्नेह की अविरल धारा ,
प्रतिपल मन की चाह ,थाम लें हाथ तुम्हारा |
हमें उतरना पार ,  नाव की बनें खिवैया ,
जग की पालनहार , हे वरदायिनी मैया ||

मैंने कुछ बोला नहीं, रहे अधर बस मौन,
फिर मेरे मन की दशा, भला बताए कौन।
भला बताए कौन  , दिलासा दे जाती हो,
देकर सरल निदान, विघ्न सब ले जाती हो।
संस्कार किए भेंट  , मुझे सुन्दर से गहने,
माँ तेरे उपहार  , मान से पहने मैंने ||

माँ कहते ही आ गई ,फिर मुख पर मुस्कान ,
मुकुलित है मन की कली ,हुए उमंगित प्राण |
हुए उमंगित प्राण , याद जब तेरी आए ,
सुमना सी मन वास ,साँस मेरी महकाए |
संग सखी सी आप ,सदा रहती मेरे हाँ ,
आया क्या ना याद ,मुझे बस कहते ही माँ !!


~~~~~~~~००००००~~~~~~~



  


Tuesday, 27 August 2013

शुभ जन्माष्टमी


डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 

भूले से भगवान ने ,मन में किया विचार ,
रहकर सबके साथ में ,  देखें यह संसार |
देखें यह संसार  ,    भला कैसी है माया ,
दीं   क्या हमने भेंट ,भक्त ने क्या क्या पाया |
चले उठाने  मुकुट ,  मुरलिया जब झूले से ,
कुछ न आ सका हाथ , रह गए बस भूले से ||


ऐसे ..चकित नंदलाल ....मेरे मदन गोपाल ...करें सबका ख्याल !!

राधा की पायल बनूँ ,या बाँसुरिया श्याम ,
दोनों के मन में रहूँ ,इच्छा यह अभिराम |
इच्छा यह अभिराम ,  संग राखें बनवारी ,
दो बाँसुरिया देख  ,  दुखी हों राधा प्यारी |
हो उनको संताप , मिलेगा सुख बस आधा ,
कान्हा के मन वास , चरण में रख लें राधा ||

राधे प्यारी !!......... सुनो अर्ज़ हमारी ..............हरो विपदा सारी !!

बहुत शुभ कामनाओं के साथ 
ज्योत्स्ना शर्मा 

Monday, 19 August 2013

राखी मंगल कामना ....


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

अक्षत आशाएँ रहें  ,  रोली हो विश्वास ,
भले नयन से दूर हो ,मन से हर पल पास |
मन से हर पल पास ,ध्यान बस रहे तुम्हारा ,
सुख ,समृद्धि अपार ,प्यार भी तुम पर वारा |
भूल न पाए भ्रात  ,  रहे कर्त्तव्यों में रत |
मन के मंगल भाव ,रहें सब आशा अक्षत ||१

राखी मंगल कामना ,शुभ आशिष ,उपहार ,
भाई के मन बाँधती ,  इक धागे से प्यार |
इक धागे से प्यार ,सजाती सुन्दर मोती ,
माँग प्रभु से सार ,सुखों की लड़ी पिरोती |
मात-पिता -तुम संग ,मुदित है मन का पाखी ,
सँवरा घर-संसार , लाज भैया ने राखी ||२

रक्षा बंधन के पावन पर्व पर हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ ..

                      ज्योत्स्ना शर्मा 
           ~~~~~~~~****~~~~~~~~

Wednesday, 14 August 2013

भारती माँ जय बोलें ...



डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
बहुरंगी दुनिया भले ,रंग भा गए तीन ,
बस केसरिया ,सित ,हरित ,रहें वन्दना लीन।
रहें वन्दना लीन , सीख लें उनसे सारी ,
ओज ,शूरता ,त्याग ,शान्ति हो सबसे प्यारी ।
धरा करे शृंगार  ,वीर ही रस हो अंगी ,
नस नस में संचार ,भले दुनिया बहुरंगी ।।
2
बोलें जिनके कर्म ही , ओज भरी आवाज़ ,
ऐसे दीपित से रतन ,जनना जननी आज ।
जनना जननी आज ,सुता झाँसी की रानी ,
वीर शिवा सम पुत्र ,भगत से कुछ बलिदानी ।
कुछ बिस्मिल आज़ाद , नाम अमृत रस घोलें ,
गाँधी और सुभाष ,भारती माँ  जय बोलें ।।
3
एक लड़ाई कल लड़ी ,एक लड़ाई आज ,
विजयी गाथाएँ लिखें ,जिएँ मातृभू काज ।
जिएँ मातृभू काज ,मिटाएँ सब अँधियारा ,
खोलें नयन कपाट ,दिखाएँ कर उजियारा ।
भारत बने महान ,सकल जग करे बड़ाई ,
ठान तमस से रार ,लड़ेंगें एक लड़ाई  ।।

हार्दिक शुभ कामनाओं के साथ .....


ज्योत्स्ना शर्मा