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Friday, 5 August 2022

176- दो लोरियांँ


 लोरी - 1
मेरे राजदुलारे सो जाओ कल सूरज के संग उठ जाना
मेरी राजदुलारी सो जाओ कल किरणों के संग मुस्काना


तुम बनकर गीत सरस , सुन्दर
बस वचन मधुर कहते रहना
सबके मन में बन प्रीत अमर
रसधारा से बहते रहना
कलियाँ खिल जाएँ उमंगों  की
खुशियाँ ही खुशियाँ बरसाना । मेरे ....

तुम कृष्ण मेरे तुम राम मेरे
तुम राधा , मीरा , सीता हो
तुम भगत सिंह ,आज़ाद मेरे
तुम लछमी और सुनीता हो
राकेश, कल्पना के जैसे
अम्बर पर झन्डा फहराना । मेरे .....

लोरी -2 

आओ री निन्दिया रानी अंखियन में आओ
बिटिया को मेरी आकर सुलाओ
बिटवा को मेरे आकर सुलाओ

आओ तो संग ध्रुव, प्रह्लाद को लाओ
आओ तो गार्गी , अपाला को लाओ
ज्ञान का भक्ति का दीपक जलाओ ....

आओ कबीर सूर तुलसी को लाओ
आओ रसखान और मीरा को लाओ
सुन्दर कविता से मन को सजाओ....

आओ तो राणा प्रताप को लाओ
आओ तो पृथ्वी , छत्रसाल को लाओ
दुश्मन की छाती पे चढ़ना सिखाओ

आओ तो रानी लछमी को लाओ
आओ तो भगत सिंह ,आज़ाद को लाओ
माटी की खातिर मिटना सिखाओ

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
(चित्र गूगल से साभार)







Monday, 28 December 2015

पैगामे दिसम्बर !




यूँ तो हरेक साल ही आता है दिसम्बर 
लेकिन नए सबक़ भी सिखाता है दिसम्बर ।

चम्पई सी धूप तो कोहरे की शॉल में
अपने बदन को कैसे छिपाता है दिसम्बर ।

गौरव कथा सुनाती है 'सोलह' जो साथियों 
तो दर्द में किसी के रुलाता है दिसम्बर ।

रिश्तों की ओढ़नी पे बिछी बर्फ़ ही मिली
विरहन को मगर आग लगाता है दिसम्बर ।

गर्माहटों से प्रेम की भर जाए जनवरी(ज़िंदगी)
देके दुआ दिल से ये,  जाता है दिसम्बर ।


नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ ......

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

(चित्र गूगल से साभार)

Friday, 4 September 2015

कृष्ण ही प्रीत है



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


कृष्ण ही प्रीत है,कृष्ण शृंगार है
कृष्ण राधा के जीवन का आधार है
चोर माखन का,वंशी बजैया भी है
विष भरे कालिया का नथैया भी है
काल असुरों का,मैया का प्यारा लला
द्रौपदी का सुदामा का सच्चा सखा
रास मधुबन में आकर रचाता वही 
ज्ञान गीता का रण में सुनाता वही
उसकी गाथा मधुर रस भरा गीत है
कृष्ण जीवन का हम सबके संगीत है .........
         
            अद्भुत चरित्र ...कृष्ण तो नाम ही आकर्षण का है । रास रचाता है तो योगेश्वर भी है ।गैया चराता है तो गीता का ज्ञान भी देता है । ऊखल से बँधता है तो भयंकर असुरों का संहारक भी है । ऐसे मधुर ,ऊर्जा से भरे ,चोर लेकिन विश्व भर के लाड़ले कृष्ण के जन्मदिन पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ ..मेरे लीलाधर अपनी कृपा सब पर बरसाएँ !!

-ज्योत्स्ना शर्मा

४-९-१५
(चित्र गूगल से साभार )

Tuesday, 21 July 2015

एक लड़की !


प्यारी बेटियों को समर्पित ...एक कविता ......

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


क्या कहें क्या कमाल करती है,
वक़्त से भी सवाल करती है ।१ 

बेफिकर ख़ुद ,जहान के ग़म पे,
आँख रो-रो के लाल करती है ।२ 

खींच कर कौन खुश लकीरें ये ?
हाय ! कहकर मलाल करती है।३ 


खूब हँसती है तो कभी रोकर ,
रीते आँखों के ताल करती है।४ 

चोट खाकर भी ,मीठी बातों से,
देखिए तो ! निहाल करती है।५ 

प्यार अम्माँ से बहुत ,बाबा का,
दिल से कितना ख़याल करती है।६

आज  चर्चा है इन हवाओं में 
काम वो बेमिसाल करती है ।।७

एक लड़की है दिल की बस्ती में ,
हक़ से रहती ,धमाल करती है।८ 


*****~~~~~*****
(चित्र गूगल से साभार )

Monday, 23 March 2015

कोटिशः नमन !


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

है चाह इतनी माँ भारती पर
ये सारा जीवन निसार दूँ मैं ,
या जो मिटे हैं वतन की खातिर-
उन्हीं पे साँसें भी वार दूँ मैं |
भगत, राज , सुख , अशफाक़ सुत हों-
सुता हों झाँसी की लक्ष्मी बाई ,
आज़ाद जग में हो मान तेरा –
अमन की कलियाँ सँवार दूँ मैं !

‘शहीद दिवस’ पर वीर शहीदों को सादर श्रद्धांजलि !!


~~~~~~~~******~~~~~~~~

Sunday, 8 March 2015

सच कहती हूँ !




डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

साथ तुम्हारा करता है मग़रूर मुझे,
दिल से अपने अब मत करना दूर मुझे |

बाबुल तेरी उँगली थामे घूम फिरी ,
तब लगती थी ये दुनिया मश्कूर मुझे |

माँ तेरी जाई के पंखों में दम है ,
सच कहती हूँ ! क्यों समझा मजबूर मुझे| 

घर तेरा और माँ-बाबू जी हैं मेरे,
कर लो ये बँटवारा है मंज़ूर मुझे |

सपने तोड़े ,पाँव बेड़ियाँ ,रस्ते बंद ,
कर पाए क्या फिर भी चकनाचूर मुझे |

क़लम-सियाही ! सखी ! तुम्हारी सोहबत ये,
रफ्ता-रफ्ता कर देगी मशहूर मुझे |

खोल दिए हैं तुमने खिड़की - दरवाज़े 
खूब निभाने आते पर दस्तूर मुझे ||

डॉ . ज्योत्स्ना शर्मा 
०८-०३-१५


Sunday, 9 November 2014

बच्ची ही हूँ !


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

निगाहों में या तो बसाया न होता,

बसाकर नज़र से गिराया न होता ।१

बुलन्दी पे था इस चमन का सितारा

अगर खुद ही हमने झुकाया न होता ।२

क़दमों तले रौंदकर रख चले थे

जो हाथों में परचम उठाया न होता ।

बच्ची ही हूँ , तेरे आँचल के साए,

क्या होती , जो ऐसा बनाया न होता |

दिवारें भी तंग हैं ,कि घर हो ,वतन हो,


खुदा ,इनको सर पे चढ़ाया न होता ।४


भला आग दिल की लगी कैसे बुझती

,
जो आँखों में दरिया समाया न होता । ५


चित्र गूगल से साभार 

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Wednesday, 5 November 2014

कहाँ जाते हम रूठ कर



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
1
उम्मीदों को दिल में जगाया तो होता,
ख़ुदी को कभी आज़माया तो होता । 1
छुटकी बहन सी ठुनकती हैं ग़ज़लें ,
बड़े भाई -सा सर पे साया तो होता ।2
मुहब्बत नहीं सिर्फ़ लैला के क़िस्से ,
कोई पाक रिश्ता बनाया तो होता ।3
सभी मुश्किलों का वो हल देगा ,तुमने,
इबादत में सर को झुकाया तो होता ।4
कहाँ जाते हम रूठ कर ,लौट आते ,
ज़रा सा भी तुमने मनाया तो होता ।5
कहे जाते हैं ,जो भी कहना था हम ,फिर,
न कहना सुना और सुनाया तो होता ।6
-0-

Tuesday, 7 October 2014

कविता हमारी !!



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

दुआ रोज़ करती है कविता हमारी ,
किसी से न डरती है कविता हमारी |1

बिखेरे यहाँ खूब खुशबू के किस्से ,
फूलों सी झरती है कविता हमारी |2

तेरी सादगी और सच्चाई हमदम ,
इन्हीं पे तो मरती है कविता हमारी |3

किसी आँख हो आँसुओं की कहानी ,
तो आहें भी भरती है कविता हमारी |4

कि, जिनके भरोसे चली थी सफ़र पर ,
उन्हीं को अखरती है कविता हमारी |5

अभावों पली पर चली नेक रस्ते ,
सरस भाव धरती है कविता हमारी |6


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Tuesday, 22 July 2014

याद आती रही !



                                                           
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


हसरतों का जला कारवाँ देर तक ,
देखते ही रहे हम धुआँ देर तक |

वक्त रहते बुझाईं न चिंगारियाँ ,
फिर सुलगती रहीं बस्तियाँ देर तक |

थाम ले नाखुदा यूँ भटकने न दे ,
खुद सँभलती नहीं कश्तियाँ देर तक |

क्या करें ग़म का मौसम बदलता नहीं ,
सह न पाएँगे हम तल्खियाँ देर तक |

अश्क मेरे अभी पोंछ बिटिया गई ,
याद आती रही मुझको माँ देर तक |

नाम तेरा भला आज क्या ले लिया ,

फिर महकती रही ये फिजाँ देर तक |
 



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(  चित्र गूगल से साभार   )