Friday, 24 July 2026

190- बैठ ऐसे न हारकर पँछी !

              1

बैठ ऐसे न हारकर पँछी
देख तू फिर उड़ान भर पँछी

तेज तूफान है , घटाएँ हैं
कड़कती बिजलियाँ डराएँ हैं
कोई मौसम सदा नहीं रहता
साथ तेरे मेरी दुआएँ हैं
जीत होगी ,न ऐसे डर पँछी
देख तू फिर उड़ान भर पँछी !

पथ में सूरज कभी सताता है
खुद भी जलता , तुझे जलाता है
इसको ढलना , ढलेगा ही,इसका
आना-जाना यही बताता है -
हौंसले रख संभालकर पँछी
देख तू फिर उड़ान भर पँछी !

बैठ ऐसे न हारकर पँछी
देख तू फिर उड़ान भर पँछी !

               2 

सुनो प्रार्थना हे प्रभु मेरी !

और करो मंगल ,
मचा मन-संसद में दंगल !

ये इच्छाएँ लड़ें परस्पर
भाषण झाड़ रहीं
एक दूजे के लिखे हुए सब
पन्ने फाड़ रहीं
नहीं बस्तियाँ सभ्यजनों की
लगता है जंगल !
मचा मन-संसद में दंगल!

मुझको यूँ तड़पाकर इनको
दर्द नहीं होता
सूख गया है जैसे इनके
भावों का सोता
लिपटी चारों ओर सर्पिणी
त्याग हुआ संदल !
मचा मन-संसद में दंगल!

नम्र निवेदन मेरा ,इस पर
थोड़ा करो मनन
समझा दो कुछ या फिर इनका
कर दो आप दमन
अश्रु-जल से और अधिक अब
सिक्त न हो अंचल !
मचा मन-संसद में दंगल !

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

Wednesday, 15 April 2026

189- हर मन की चाहना


हर मन की चाहना है करूँ काम राम का

जुटना सभी को ,वक्त नहीं है आराम का

भक्ति, ओज , वीर तभी आ विराजते
समवेत स्वर में गूंजता जब नाम राम का  ।।

इतिहास कह रहा है ज़रा सी न भूल हो
स्वार्थ की तनिक सी भी मन पर न धूल हो
शृंगार करें मिलके सभी राष्ट्र-धर्म का
हाथ में सद्भाव का सुन्दर-सा फूल हो ।।

अपनी मोहब्बतों को उसके नाम लिख दिया
बाकी की ख्वाहिशों को तो आराम लिख दिया
हो कर्म हमारे सभी वतन के वास्ते
और धड़कनों पे हमने अपनी राम लिख दिया ।।

आज्ञा पिता की राज को भी छोड़ते है राम
मर्दन करें दुष्टों का दर्प तोड़ते हैं राम
केवट, निषादराज,कपि, शबरी के हो गए
जब  बाँटती है दुनिया तब जोड़ते हैं राम।।

वो आ गए हैं जानकर दिल को आराम है
फुरसत नहीं जरा भी मुझे कितना काम है
पूछते हो क्या भला आखिर वो कौन हैं
बसते थे रोम-रोम में साकार राम हैं ।।

प्रतीक्षा की बहुत आखिर घड़ी सुन्दर ये आई है
बधाई है ,  बधाई है सकल जग को बधाई है
अयोध्या से लिपट खुशियाँ खुशी से नाचतीं देखो
सुदर्शन राम की सूरत नयनों में समाई है  ।।

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 







Tuesday, 22 July 2025

188- अभिनंदन


                           (चित्र गूगल से साभार)


यूँ ही .....
थाम कर हाथ
बेख्याली में
चल पड़ी सदी
ठगी सी खड़ी है
सप्तपदी ।1
***********
सकरी गलियाँ
सीलन भरे अँधेरे
धूप का स्वाद
कैसे बताएँ
लील गईं सूरज
अट्टालिकाएँ ।2
***********
हाथ कुछ आता नहीं
बेचैन कर जाते हैं
जाने ये सपने
क्यों आते हैं !3
********
हे ईश्वर !
उसकी
तृप्ति भरी शाम हो
सुखद सवेरा हो
जो बचे उसकी चाहत से
वही, बस वही मेरा हो ।4
**********
रिश्ता तो बस ऐसे
बनाया और निभाया जाए
जैसे टूटे सपनों की किरचें
चुभती हैं आँखों में
और ....
घाव दिल पर उभर आए ।5
************
नजदीकियों को
कर दिया दूर
बढ़ा दिया
दूर वाला प्यार
मोबाईल फोन ने
इतना किया उपकार ।6
***********
मत मिलो मुझसे
मत प्यार बरसाओ
बस इतना कर दो
आंखें मूँदूं तो
तुम बस तुम नज़र आओ ।7
***********
मैंने किया उसका
अभिनंदन !
नज़र भी उतारी है
प्रेम से भरी एक कविता
नफरत के महाकाव्यों पर
भारी ! बहुत भारी है ।8
*************
सुन्दर इच्छाओं के
गुलाबों से
मन को कुछ ऐसे
सजाया जाए
फिर ....
कर्मों की माला
बनाकर धरा को
महकाया जाए.....।9
********
अनुनय की धरा ने
गिड़गिड़ाई
नहीं माना सागर
खूब गरजा, बरसा,
"तुमने अपने बच्चों को
अक्ल नहीं सिखाई" ।10
*********
सबको भाती है
मुस्कानों की बंदनवार
कोई-कोई सुनता है
भीतर के मौन का
हाहाकार ।11
*********
मसले पड़े हैं फूल,
कलियाँ ,
पत्तियाँ आहें भरतीं हैं
हैरत है !
तितलियाँ फिर भी
उड़ान भरतीं हैं ।12
**********
ठोका , पीटा , तराशा
कभी तपाया , गलाया
फिर मुस्कराया ....
तूने मुझे
मैंने तुझको बनाया।13
***********
आँखों में अनुरोध लिए
उसने कहा
माँ! मेरा जन्मदिन
ऐसे मनाना
आज आप मुझे
अकेले मत सुलाना।14
**********
उन्होने
जलसे में बाँटकर
शब्दों की मिठाई
नन्हे रामू की
खूब फटकार लगाई
क्यों रे !
तुझे अब तक
कार धोनी न आई !15
**********
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
वापी




Monday, 30 December 2024

187- खिलती खूब बहार मिले !


 स्नेहिल मित्रों , बन्धुजनों को 

खिलती खूब बहार मिले,

सुन्दर, सरस, मधुर हो जीवन 

स्नेहपूर्ण व्यवहार मिले ।

नयी मंजिलें, नये शिखर हों 

नित-नित हो आगे बढ़ना ;

पग-पग पर पथ सरल रहे , हर

कठिनाई को हार मिले ।।

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 


Thursday, 26 December 2024

186-छाया है कोहरा घना !




  (चित्र गूगल से साभार )


छाया है कोहरा घना
मन है अनमना !

चमकीं हैंं लाइटें
गाड़ियों का शोर है
जाने दुपहरिया है ?
साँझ है कि भोर है  ?
धुंध का वितान-सा तना
मन है अनमना !

देखो नज़दीकियाँ  भी
आज हुईं ओझल
सँझा को सांसे भी
लगतीं हैं बोझल
मौसम भी दे यातना
मन है अनमना !

धीरे-धीरे घट जाए
फिर दिन की पीर
एक किरन आ जाए
कुहरे को चीर
इतनी सी है चाहना 
न रहे अनमना  !

छाया है कोहरा घना
मन है अनमना ।।

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

Wednesday, 1 November 2023

185- अर्घ्य प्रेम का

 



दिल ये चाहे
बिखरा दूँ कलियाँ
राहों में तेरी ।

न आँसू तुम
कजरा भी नहीं हो
नैनों मे बसे ।

चिरसंगिनी
खुशियाँ हों तुम्हारी
दुआ हमारी ।

लाज-चूनर
उमंगों के कंगन
प्रेम का अर्घ्य ।

सौभाग्य माँगूँ
खुशियों की पायल
बजती रहे ।

हों पूरे सदा-
नयनों में सजे जो,
ख्वाब तुम्हारे ।

तेरे प्यार ने
नहीं बुझने दिया
जीवन-दिया ।

मेरी दुआएँ
सजनी सदा संग
पिया का पाएँ ..... करक चतुर्थी पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐

ज्योत्स्ना 




Tuesday, 5 September 2023

184- शिक्षक खेवनहार !


 

मात-पिता शिक्षक प्रथम , दूजे शिक्षाधाम
तीजे जड़-जंगम जगत , सबको करूँ प्रणाम ।।

नन्हें पौधों को दिया, स्नेह सींच विस्तार ।
माली बनकर आपने , सबको दिया सँवार ।।

भ्रम के अँधियारे घिरें , सूझे आर न पार ।
देकर दीपक ज्ञान का , करते पथ उजियार ।।

उच्च लक्ष्य सन्धान कर , करें राष्ट्र निर्माण ।
महिमा गुरुवर आपकी , गाते वेद-पुराण।।

लोभ , मोह , छल छद्म का ,सागर है संसार  ।
जीवन नैया बढ़ चले , शिक्षक खेवनहार ।।

निर्माता हैं राष्ट्र के , रविकर-निकर समान ।
सदा हृदय से कीजिए, शिक्षक का सम्मान ।।

व्यस्त रहें शिक्षक सदा, हो कोई अभियान ।
अध्यापन का दीजिए , समय इन्हें श्रीमान ।।


भारत के पूर्व राष्ट्रपति , प्रसिद्ध शिक्षाविद्, महान विचारक डॉ.  सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयन्ती पर उन्हें शत् शत् नमन तथा सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🙏💐


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा