Tuesday, 31 January 2017

शुभ वसंत पंचमी !

डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 

भारत में हे भारती ,सुख बरसे सब ओर 
कटे अमंगल की निशा ,सजे सुहानी भोर 

कैसी आहट -सी हुईआए क्या ऋतुराज ? 
मौसम तेरा आजकल , बदला लगे मिजाज।


अमराई बौरा गई , बहकी बहे बयार 
सरसों फूलीसी फिरे ,ज्यों नखरीली नार ।।

तितली अभिनन्दन करे,मधुप गा रहे गान।
सजी क्यारियाँ धारकर ,फूल कढ़े परिधान ।।

मोहक रंग अनंग के,धरा खेलती फाग 
खिलते फूल पलाश के,ज्यों वन दहके आग ।।
 

(चित्र गूगल से साभार )

Friday, 16 December 2016

सीखे हैं सबक हमने .........

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

रूठे हैं जो क़िस्मत के तारों के बहाने से
वो मान भी जाएँगे थोड़ा सा मनाने से

तन्हाई से घबरा के निकले थे सुकूँ पाने
गम ले के चले आए ख़ुशियों के घराने से

सीता तो हुई रुसवा ,मीरा को विष, अब भी
कृष्णा ये कहे ठहरो ! बाज़ आओ सताने से

सागर के सीने में एक आग भी होती है
भड़के तो कहाँ साथी ! बुझती है बुझाने से

हारेंगे न बैठेंगे कोई लाख जतन कर ले
सीखे हैं सबक़ हमने उस्ताद ज़माने से !

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(चित्र गूगल से साभार)

Wednesday, 14 September 2016

मन हिंदी मुस्काई !




डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

बरस बीतते एक दिवस तो
मेरी सुध आई
मन हिन्दी  मुस्काई ।

गिट-पिट बोलें घर बाहर सब
नाती और पोते
नन्ही स्वीटी रटती टेबल
खाते और सोते
खूब पार्टी घर में अम्मा
बैठी सकुचाई
मन हिन्दी  मुस्काई !

ओढ़े बैठे अहंकार की
गर्द भरी चादर
मान करें मदिरा का छोड़ी
सुधामयी गागर
पॉप,रैप  के संग डोलती
बेबस कविताई
मन हिन्दी  मुस्काई !

अपनों में अपनापन लगता
झूठा- सा सपना
कहाँ छोड़ आए हो बोलो
स्वाभिमान अपना
गौरव गाथा दीन-हीन की
जग ने कब गाई
मन हिन्दी  मुस्काई !

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(चित्र गूगल से साभार )

Wednesday, 24 August 2016

जादूगर कैसे हो !







डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

1
उमड़ेफिर बरस गए
ये नैना कान्हा
दर्शन को तरस गए ।
2
दर्पण से धूल हटा
झलक उठे मन में
मोहन की मधुर छटा ।
3
दिल खूब चुराता है
लाल यशोदा का
फिर भी क्यों भाता है ।
4
दाऊ के भैया ने
सबको त्राण दिया
उस नाग-नथैया ने ।
जादूगर कैसे हो
जो जिस भाव भजे
उसको तुम वैसे हो ।
6
इक राह दिखाई है
मीत सुदामा के
क्या रीत निभाई है।
7
मन उजला तन काला
मोह गया मोहन
मन, बाँसुरिया वाला ।
8
मुख अमरित का प्याला
कितनी छेड़ करे
यह नटखटगोपाला !
9
भोली -सी सूरत पे
रीझ गई रसिया
मैं प्यारी मूरत पे ।
10
भक्तों को मान दिया ।
मोह पड़े अर्जुन
गीता का ज्ञान दिया ।

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(चित्र गूगल से साभार ) 

Sunday, 14 August 2016

शुभ स्वतन्त्रता दिवस !

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

खूब सजाना जनतंत्र के चारों ही आधारों को ,
और सज़ा देनी है पहले भीतर के ग़द्दारों को
नाहक छेड़ करें ना दम्भी  ,दूध छठी का याद करें
पाठ पढ़ाना है कुछ ऐसा उन कुटिलों ,मक्कारों को।।1

अभिलाषा है आज लेखनी,सरस मधुर रसधार बने
वक़्त पड़े तो खूब गरजती वीरों की हुंकार बने
करके अर्चन अरिमुण्डों से जननी का शृंगार करें
भीतर बाहर के घाती को दोधारी तलवार बने ।।2
         
पूरे करने हैं जननी के, सपने,  सब अरमान हमें
उसकी ख़ुशियों पर करने हैं अपने सुख क़ुर्बान हमें
बोस,जवाहर,गाँधी बिस्मिल नाज बहुत हमको तुमपर
सिंह भगत ,आज़ाद ,याद हैं वीरों के बलिदान हमें।3

Friday, 8 April 2016

शुभ कामनाएँ !



नव संवत्सर, गुडी पाडवा ,चेटी चण्ड एवं उगादी पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएँ !
-डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा  
मेरे घर से आप का , यूँ तो घर है दूर 
मगर दुआ के पेड़ हैं, छाया ,फल भरपूर 

माँ मंजूषा स्नेह की , माँ ममता की खान 
संचित शत सद्कर्म से ,मिले भक्ति वरदान 

जन्मा,पाला,दंड दे, दिया सुघड़ मन, वेश 
माँ तुझमें तीनों बसे ,ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश 

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                    (चित्र गूगल से साभार )