डॉ•भावना कुँअर को पढ़ना
मेरे लिए हमेशा रोमांचक, आत्मीय भाव जगाने वाला और रससिक्त करने वाला रहा है। सद्य
प्रकाशित सेदोका- संग्रह ‘ जाग उठी चुभन’ पढ़ा तो कुछ भाव उमड़ पड़े।हाइगा और हाइकु के रूप में
प्रस्तुत हैं-
डॉ•
ज्योत्स्ना शर्मा
1
बिखरी धूप
चेहरा चूमकर
निखरी धूप।
2
व्याकुल चाँद
ढूँढ रहा चाँदनी,
यहाँ छुपी थी !
3
क़ैद तुम्हारे
इन दोनों नैनों में,
सूरज , चाँद ।
4
हुई मुखर
फिर गीतों की गंगा
बहे निर्झर ।
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