Monday, 8 June 2015

निखरी धूप




डॉ•भावना कुँअर को पढ़ना मेरे लिए हमेशा रोमांचक, आत्मीय भाव जगाने वाला और रससिक्त करने वाला रहा है। सद्य प्रकाशित सेदोका- संग्रह ‘ जाग उठी चुभन’ पढ़ा  तो कुछ भाव उमड़ पड़े।हाइगा और हाइकु के रूप में प्रस्तुत हैं-
डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
बिखरी धूप
चेहरा चूमकर
निखरी धूप।
2
व्याकुल चाँद
ढूँढ रहा चाँदनी,
यहाँ छुपी थी !
3
क़ैद तुम्हारे
इन दोनों नैनों में,
सूरज , चाँद ।
4
हुई  मुखर
फिर गीतों की गंगा
बहे  निर्झर ।
-0-

9 comments:

  1. Aapne to kamal kar diya logon ke anuswar SUNDR Photo ko or jayada sundar bana diya bahut bahut aabhar...

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    1. bahut aabhar aapakaa aur haardik shubh kaamanaayen !

      saadar
      jyotsna sharma

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  2. आपने हाइकु के द्वारा सौन्दर्यबोध को ऊँचे सोपान पर बिठा दिया है । सभी हाइकु भावपूर्ण हैं।' व्याकुल चाँद
    ढूँढ रहा चाँदनी,
    यहाँ छुपी थी !
    सचमुच उस चाँदनी को भावना जी छुपाए हुए थी। ईश्वर से कामना है कि बाहर -भीतर यह चाँदनी अनवरत रूप से बरसती रहे। जीवन सरसता से आप्लावित होता रहे।

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  3. bahut aabhar aapakaa aur meri bhi haardik shubh kaamanaayen !

    saadar
    jyotsna sharma

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  4. क्या बात है ज्योत्स्ना जी!
    बहुत खूब!!

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    1. बहुत आभार अमित जी !

      सादर
      ज्योत्स्ना शर्मा

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  5. खूबसूरत हाइगा, भाव-विभूति से परिपूर्ण सभी हाइकु एक से बढ़ कर एक हैं. सुंदर लेखनी के लिए साधुवाद...डॉ भावना कुँअर जी को बधाई.

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  6. ज्योत्सना जी आप की लिखत को पढ़ना ज्ञान को बढ़ाना है ।सैन्दर्य एवम् भाव से भरे हाइकु आन्नदित कर गये ।
    सभी हाइकु रचना सौन्दर्य से परिपूर्ण दिल को छूने वाले हैं ।वधाई

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