Saturday, 12 April 2014

ख़ुशबू से तर ......


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

चाक जिगर पर ख़ुशबू से तर देखे हैं ,
हमने उनके.......काँटों में घर देखे है |

सिर्फ दुआएँ लब पर ममता , दुनिया ने ,
उस मूरत में............पीर-पयंबर देखे हैं |

जिन पर अक्सर होता है विश्वास बहुत ,
उन हाथों में.........हमने खंजर देखे हैं |

खोला पिंजर ,कल जिसको आज़ाद किया ,
उस चिड़िया के.......कतरे से पर देखे हैं |

हाफ़िज़ तक महफूज़ नहीं इन आँखों ने ,
जाने कैसे – कैसे............मंज़र देखे हैं |

  
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12 comments:

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    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  2. जिन पर अक्सर होता है विश्वास बहुत ,
    उन हाथों में.........हमने खंजर देखे हैं |
    ...वाह...लाज़वाब ग़ज़ल...

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    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  3. Replies
    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  4. वाह! बेहद खूबसूरत ग़ज़ल …हर शेर नायाब...

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    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  5. जिन पर अक्सर होता है विश्वास बहुत ,
    उन हाथों में.........हमने खंजर देखे हैं
    लाजवाब .. सच कि अभिव्यक्ति है ये शेर ... लाजवाब गज़ल ..

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    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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  6. जिन पर अक्सर होता है विश्वास बहुत ,
    उन हाथों में.........हमने खंजर देखे हैं |
    .....लाज़वाब ग़ज़ल...

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    1. हृदय से आभार आपका |
      सादर
      ज्योत्स्ना

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