Wednesday, 4 March 2015

हाँ सखि होली !!



डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 

जब-जब पास हमारे आए
रंग ख़ुशी के मुख पर लाए
जी भर छेड़े ,करे ठिठोली 
क्या सखि साजन
ना सखि होली ।
२ 
करता मस्ती नहीं अघाए
भक्ति की कभी भाँग चढ़ाए 
फिरे बहकता करता गुनगुन
क्या सखि साजन
ना सखि फागुन ।
खूब मिले होली के मेले 
जब ग़ैरों के हाथों खेले
छेड़ ,भिगोए चोली सारी
क्या सखि साजन
ना पिचकारी । 
हृदय में धारे रस की धार
करे वो सब पर धम से वार
बचने की हम युक्ति हारे
क्या सखि साजन
ना ग़ुब्बारे ।

~~~~&&&&&~~~~~~
चित्र गूगल से साभार 


15 comments:

  1. वाह ... क्या खूब लिखा है ... होली की फुलझड़ी छोड़ दी ...

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  2. रंगों के महापर्व होली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (06-03-2015) को "होली है भइ होली है" { चर्चा अंक-1909 } पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. वाह! वाह! बहुत ख़ूब !
    आपको सपरिवार होली की रंगभरी शुभकामनाएँ ! :-)

    ~सस्नेह
    अनिता ललित

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  4. सटीक सामयिक प्रस्तुति

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. बहुत सुंदर और रंग बिखेरती मुकरियाँ...मंगलकामनाएँ!!

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  7. हृदय से आभार हिमकर श्याम जी !

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  8. अरे वाह ... बहुत ख़ूब मजा आ गया
    पर बहुत देर से पंहुचा हूँ

    आज कई दिनों ब्लॉग पोस्ट करने का मौका मिला
    आपका स्वागत है ब्लॉग पर

    Recent Post शब्दों की मुस्कराहट पर मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं : )

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    1. बहुत - बहुत धन्यवाद संजय जी :)

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  9. देरी के लिए क्षमा चाहूँगा । कहन मुकरनियों का जवाब नहीं ! अमीर खुसरो की याद दिला दी आपने ।
    हार्दिक बधाई

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    1. आपके स्नेह और आशीर्वाद की सदा चाहना है !

      सादर
      ज्योत्स्ना शर्मा

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