Friday, 26 October 2018

139-तुमसे उजियारा है !





माँ वाणी की कृपा और ..
आप सब की शुभकामनाओं से मेरे सद्य प्रकाशित माहिया- संग्रह  'तुमसे उजियारा है' से -


    सुख के साथ दुःख , अँधेरे के साथ उजाला जीवन के आम्नात सत्य हैं , दोनों परस्पर एकनिष्ठ भाव से एक-दूसरे का अनुसरण करते हैं तो मेरे इस प्रयास के भी श्वेत-श्याम दोनों पक्ष होंगे ही | यदि कुछ भी सुन्दर, सुखद है तो वह माँ वाणी का कृपा प्रसाद है | जो त्रुटियाँ हैं वह मेरी हैं ,उनके लिए क्षमा प्रार्थिनी हूँ | साथ ही आभार व्यक्त करती हूँ आदरणीय रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जी का जिन्होंने इस सृजन-यात्रा में मेरा पथ प्रदर्शन किया | त्रिवेणी , सहज-साहित्य , आधुनिक साहित्य , उदंती , हरिगंधा , सरस्वती सुमन , अनुभूति आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं की भी हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने समय-समय पर मेरे माहिए प्रकाशित कर मेरा उत्साह बढ़ाया | त्रिवेणी पर तथा अन्यत्र प्रकाशित मेरे माहिया पढ़कर सुन्दर प्रतिक्रियाओं से मेरे लेखन को ऊर्जा प्रदान करते परम आदरणीय श्याम त्रिपाठी जी (सम्पादक-हिन्दी चेतना ),आ. विज्ञानव्रत जी , सुदर्शन रत्नाकर जी , कृष्णा वर्मा जी , प्रियंका गुप्ता जी , कमला घटाऔरा जी , कमला निखुर्पा जी , शशि पाधा जी , डॉ. भावना जी , डॉ. कविता भट्ट जी , ज्योत्स्ना प्रदीप जी , अनिता ललित जी ,सुनीता काम्बोज जी , प्रिय अनिता मंडा , सुशीला शिवराण जी , डॉ. जेन्नी शबनम जी , राजेश कुमारी जी , डॉ. सुरेन्द्र वर्मा जी एवं सुभाष चन्द्र लखेड़ा जी के प्रति भी बारम्बार आभारी हूँ |
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स्वर्गीय पिता जी का आशीर्वाद सदैव मैंने अपने साथ अनुभव किया है , मेरे शब्द-शब्द में वही तो हैं, उन्हें कोटिशः नमन | आदरणीया माँ , अनुजा विद्योत्तमा और प्रिय अनुज विक्रमादित्य एवं आशुतोष के सराहना भरे शब्द मन को आनंद से भरते रहे हैं ,दोनों भ्रात-वधु नीता और मोनिका भी समय-समय पर सुन्दर शब्दों से उत्साह बढाती रहीं  उनके प्रति मेरी ढेरों शुभाशंसाएँ ! माँ को सादर नमन ! परिवार के सहयोग के बिना तो कोई कार्य संभव ही नहीं | मेरे जीवन सहचर श्री अनिल जी मेरे लेखन की आत्मा हैं , बिखरा ,फैला घर , शाम ढले न दीया न बाती कम्प्यूटर पर लिखने में डूबी ज्योत्स्ना शर्मा की रचनाओं में यदि सुख के स्वर सुनाई दें तो इसका श्रेय निःसंदेह उन्हें ही जाता है , इसके लिए धन्यवाद शब्द बहुत छोटा है | प्रिय बिटिया अनन्या और बेटे अनन्त का मेरी रचनाओं के प्रकाशन पर प्रफुल्लित मुख और सुन्दर प्रतिक्रियाएँ मुझे आनंद से भर देते है , उनके लिए ढेरों शुभकामनाएँ |
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आकर्षक आवरण पृष्ठ के लिए आ. के. रवीन्द्र जी एवं सुन्दर , मोहक कलेवर में आबद्ध कर मेरे इन माहिया छंदों को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने के लिए आदरणीय गिरिराजशरण अग्रवाल जी एवं हिन्दी साहित्य निकेतन परिवार के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ | उनके इस सकारात्मक सहयोग के बिना यह कार्य संभव ही न था |

तुमसे उजियारा है’ में आपसे , समाज से प्राप्त विविध रसान्वित अनुभूतियों को ही माहिया के रूप में कहा है | मेरी इन रचनाओं में आपकी सहृदयता की ही उजास भरी है | यदि कुछ माहिया छंद भी उस आत्मिक प्रकाश को आप तक पहुँचाने में समर्थ हो सके तो मैं अपने प्रयास को सफल समझूँगी | आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी |

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा


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18 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (27-10-2018) को "पावन करवाचौथ" (चर्चा अंक-3137) (चर्चा अंक-3123) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार आपका !

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  2. अतिसुन्दर। बहुत बहुत शुभकामनाएं

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    1. सहृदय उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार आपका !

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  3. बहुत ख़ुशी की बात है।हार्दिक बधाई ज्योत्स्ना जी।

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    1. सहृदय उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार दीदी !

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  4. बहुत बहुत सुंदर,ये तो हर्ष का विषय है,हृदय से बधाई ज्योत्स्ना जी!आपकी लेखनी निर्बाध चलती रहे और हम आपके काव्य का इसी तरह रसास्वादन करते रहें,माँ सरस्वती का वरदहस्त आप पर हमेशा बना रहे....हार्दिक शुभकामनाएँ!

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    1. सहृदय उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार आपका !

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  5. आपकी संवेदनशील रचनाओं से हम, ऐसे ही रूबरू होते रहे। आपकी यह साहित्यिक यात्रा अविराम चलती रहे। हार्दिक मंगलकामनाएँ 🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🍫🍫🍫

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    1. सहृदय उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार आपका !

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  6. हार्दिक बधाई एवं आभार अनुजा !!

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    1. अनुगृहीत हुई आदरणीय भैया जी !

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  7. Aapne bahut achchha kam kiya hai iske liye aapko anekonek badhaiyan aap yun hi aage likhti rahen inhi shubhkamnaon ke saaath...

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    1. हृदय से आभार भावना जी !

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  8. अतीव प्रसन्नता का विषय आदरणीया, डॉ ज्योत्स्ना जी, हार्दिक बधाई इस सुंदर कृति के लिए।

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    1. हार्दिक धन्यवाद कविता जी

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  9. बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामना आपको

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    1. हार्दिक धन्यवाद सत्या शर्मा जी

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