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| चित्र :गूगल से साभार |
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
मन का तार सितार हुआ है
,
गीतों से....गुलज़ार हुआ है ।
ग़म अपनाए खुशियाँ बाँटीं ,
मत कहिये
व्यापार हुआ है ।
माना राहें....बहुत कठिन हैं ,
अब
चलना...दुश्वार हुआ है ।
बहुत अँधेरा...दीप जला लें ,
देखें...अब
उजियार हुआ है ।
सतत दया हो जो प्रभु तेरी ,
बन्दा भव
से....पार हुआ है ।
बोलें तो.........ऐसा वो बोलें ,
वाणी
का......शृंगार हुआ है ।
हम हिंदी हैं ...एक लगन है ,
हमें वतन
से...प्यार हुआ है ।
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