डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
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उम्मीदों को दिल में जगाया तो होता,
ख़ुदी को कभी आज़माया तो होता । 1
छुटकी बहन सी ठुनकती हैं ग़ज़लें ,
बड़े भाई -सा सर पे साया तो होता ।2
मुहब्बत नहीं सिर्फ़ लैला के क़िस्से ,
कोई पाक रिश्ता बनाया तो होता ।3
सभी मुश्किलों का वो हल देगा ,तुमने,
इबादत में सर को झुकाया तो होता ।4
कहाँ जाते हम रूठ कर ,लौट
आते ,
ज़रा सा भी तुमने मनाया तो होता ।5
कहे जाते हैं ,जो भी कहना था हम ,फिर,
न कहना सुना और सुनाया तो होता ।6
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वाह !
ReplyDeleteहृदय से धन्यवाद आपका !
Deleteआपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (07.11.2014) को "पैगाम सद्भाव का" (चर्चा अंक-1790)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
ReplyDeleteहृदय से आभार आपका 🙏
Deleteकहे जाते हैं ,जो भी कहना था हम ,फिर,
ReplyDeleteन कहना सुना और सुनाया तो होता ।
वाह वाह :)
हृदय से आभार आपका 🙏
DeleteShandar gajal
ReplyDeleteसभी मुश्किलों का वो हल देगा ,तुमने,
ReplyDeleteइबादत में सर को झुकाया तो होता
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
हृदय से आभार आपका 🙏
DeleteWaah waah lajawaab !!
ReplyDeleteहृदय से आभार आपका 🙏
Deleteकहाँ जाते हम रूठ कर ,लौट आते ,
ReplyDeleteज़रा सा भी तुमने मनाया तो होता ...
बहुत खूबसूरत और उम्दा शेर ...एक अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद !!
हृदय से आभार आपका 🙏
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