डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
1
सोने -सी निखर गई
नाम लिया तेरा
सिमटी ,फिर बिखर गई ।
2
है दिल की लाचारी
मत खोलो साथी
यादों की अलमारी ।
3
वो लाख दुहाई दें
बस में ना उनको
अब याद रिहाई दें ।
4
अँखियाँ कितनी तरसीं !
यादों की बदली
फिर उमड़ -उमड़ बरसी ।
5
बादल तो काले थे
यादों के तेरी
बस साथ उजाले थे ।
6
हौले से हाय छुआ !
तेरी याद किरण
मन मेरा कमल हुआ ।
7
जग दरिया लाख कहे
जान गई मैं तो
परबत की पीर बहे ।
8
पीले -से पात झरे
अनचाहे ,दिल के
होते हैं जख्म हरे ।
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