Thursday, 14 February 2013
Friday, 25 January 2013
नया गीत :नया साल
नया गीत
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
नए साल में अब,
नया गीत गाना,
अरे बागवाँ इस
चमन को सजाना ।
नव वल्लरी,रुत
नई हों छटाएँ,
नया गीत गाना,
अरे बागवाँ इस
चमन को सजाना ।
नव वल्लरी,रुत
नई हों छटाएँ,
तरु
-वृन्द झूमें
सरस हों घटाएँ
कलियाँ हँसें
फूल गाएँ तराना ।।
मुदित हो धरा
निर्मल गगन हो
सुखद स्वप्न सारे
सँजोए मगन हों
खुशियों के शतदल
सरस हों घटाएँ
कलियाँ हँसें
फूल गाएँ तराना ।।
मुदित हो धरा
निर्मल गगन हो
सुखद स्वप्न सारे
सँजोए मगन हों
खुशियों के शतदल
मन-सरसि
खिलाना ।।
प्रखर रश्मियाँ हों
सुनहरी दिशाएँ
सुवासित पवन
प्रीत के गीत गाएँ
समय तू सदा अब
यहाँ मुस्कुराना ।।
अरे बागवाँ इस
चमन को सजाना ।।
-0-
Saturday, 29 December 2012
दामिनी तुम्हारे लिए !!
जो दिल ने कहा ........
विनम्र श्रद्धांजलि सहित !
दुखद है .....
जीवन की एक फ़रियाद
गई
वो लेकर कैसी याद गई ...हम शर्मिन्दा हैं दामिनी
!
दिवंगत आत्मा को
शान्ति मिले ,
समस्त हिन्दुस्तान
परिवार इस दुःख को सहन करने की सामर्थ्य पाए और हर दिल में उसकी यादों की शमा जलती
रहे ...ऐसी प्रार्थनाओं के साथ
ज्योत्स्ना शर्मा 29-12-12
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बहुत ही कठिन है वो
यादें भुलाना ,
हो दर्द दिल में
मगर मुस्कुराना |
नहीं तेरा मेरा,ये आधे जहाँ का ,
कहा दर्द डूबी कलम
ने फ़साना|
भर जायेंगें सब
जख्म धीरे धीरे ,
निशाँ देखकर होगा
मुश्किल भुलाना |
दिए हसरतों के ,ये तूफ़ान फिर भी ,
बुझा न सके ,चाहे कितना बुझाना |
मिलें मुश्किलें ,तार तेरा जिगर हो ,
मगर फ़र्ज़ से पग न
पीछे हटाना ||
ज्योत्स्ना शर्मा 28-12-12
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जीवन की एक फ़रियाद गई
दिवंगत आत्मा को शान्ति मिले ,
नहीं तेरा मेरा,ये आधे जहाँ का ,
भर जायेंगें सब जख्म धीरे धीरे ,
दिए हसरतों के ,ये तूफ़ान फिर भी ,
मिलें मुश्किलें ,तार तेरा जिगर हो ,
पोर पोर पीड़ा बसी ,अभी रहे जो मौन |
दुष्ट दुशासन को भला ,दंड दिलाये कौन ?????
अर्ज़ है ये
कोई फरमान नहीं है ...संवाद हीनता समस्या का समाधान नहीं है |
.....ज्योत्स्ना शर्मा 24-12-12
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घोर घटाएँ
हों भले ,दमक दामिनी आज ,
बनो उजाले की किरण ,जागे सकल समाज |
जागे सकल समाज , भरोसा देना होगा ,
तेरी ,हमें हिसाब , 'आह' का लेना होगा |
दोहरायें न और , निर्दयी व्यथा कथाएं ,
दमक दामिनी आज , भले घनघोर घटाएँ ||
.....दामिनी के साहस ,संकल्पशक्ति और
जिजीविषा को ह्रदय से नमन ...ढेरों दुआओं के साथ ज्योत्स्ना शर्मा 23-12-12
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हमारी ,समाज की
पीड़ा की कोई सीमा न थी
एक दुखद ,कड़वा सत्य
अनावृत था ...और ...
'तमाशबीनों' के पास
चादर न थी ......
पीड़ा की कोई सीमा न थी
एक दुखद ,कड़वा सत्य
अनावृत था ...और ...
'तमाशबीनों' के पास
चादर न थी ......
.इतने निर्मम
कैसे हो गए हम ???
.............ज्योत्स्ना ............
२१-१२-१२ .
सुना था .....
सितारों से आगे भी उसका जहाँ है ,........
वही आज क्यूँ दर्द की इन्तेहाँ है |
वो कल भी'खबर'थी,वो अब भी 'खबर' है ;
संवेदना...सो गई अब ... किधर हैं ......
और ये भी ..
"सम्पूर्ण सुरक्षा "
वादा है हमारा |
नहीं टलेगा
किसी बहाने से |
बस ज़रा हमें
फुरसत तो मिले
'हुड़दंग' मचाने से ..!!!
पूरी आशा के साथ
सितारों से आगे भी उसका जहाँ है ,........
वही आज क्यूँ दर्द की इन्तेहाँ है |
वो कल भी'खबर'थी,वो अब भी 'खबर' है ;
संवेदना...सो गई अब ... किधर हैं ......
और ये भी ..
"सम्पूर्ण सुरक्षा "
वादा है हमारा |
नहीं टलेगा
किसी बहाने से |
बस ज़रा हमें
फुरसत तो मिले
'हुड़दंग' मचाने से ..!!!
पूरी आशा के साथ
...ज्योत्स्ना शर्मा
१९-१२-१२
Sunday, 23 December 2012
Friday, 21 December 2012
क्षणिकाएँ...
डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
मुस्कान
मुस्कान
धूप
आशाओं की
जगमगा कर खिली
जब वो आकर मिली |
पीर
अनकही
कह गई
जब दिल से उठी
आँख से बह गई |
दीप
जीवन में तृष्णा
हाँ ,तृष्णा पलेगी
स्नेह ही न दोगे
तब दीप बाती
कैसे जलेगी ?
Saturday, 24 November 2012
Wednesday, 7 November 2012
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