Thursday, 11 October 2012

फूलों से सीखा .....




     डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
काँटो में बिंधना , भले चोट खाना , 
फूलों से सीखा- सदा मुस्कुराना
सपने सजाना है और कर्म करना ;
नियति के हाथों ,उन्हें सच बनाना ।।



3 comments:

  1. बहुत प्रभावशाली मुक्तक

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    1. उत्साह वर्धन के लिए ह्रदय से आभारी हूँ आपकी ...सादर ज्योत्स्ना

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  2. वह बहुत सुंदर मुक्तक

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