Tuesday, 2 October 2012

आई जो भोर



1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
  1
आई जो भोर
बुझा दिए नभ ने
तारों के सारे दिए 
संचित स्नेह
लुटाया धरा पर
किरणों से छूकर  
2
मन -देहरी
आहट सी होती है
देखूँ, कौन बोलें हैं ?
हैं भाव 
संग लिये कविता
मैंनें द्वार खोले हैं
-0-

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