क्या पूछो हो ' याद हमारी आती है ' ?
आएगी क्या , दिल से कब ये जाती है
रौशन है लेकिन धुँधला सा दिखता है
इक बदली जब सूरज पर छा जाती है
मर्यादा में बहे तो नदिया अच्छी है
तोड़े जो तटबंध ,प्रलय फिर ढाती है
ख्वाहिश का संसार अगर छोटा रख लो
सच मानों फिर दुनिया बहुत सुहाती है
चलते-चलते गिर जाओ तो उठ जाओ
अक्सर ठोकर रस्ता सही दिखाती है
तनिक सफलता पर खुश होना ठीक नहीं
बनते-बनते बात बिगड़ भी जाती है
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
(चित्र गूगल से साभार)







